ए नींद है कहा तू।

ऐ नींद, तुझे मुझसे दुश्मनी क्यो है , जब चाहता हु ,आती नही तू जब ना चाहु , गले लगाती तू याद नही क्या सपने पहले भी थे , आज भी है पहले उन्ही सपनो में खो के सोना अच्छा लगता था आज वही सपने सोने नही देते है तब तो मैं चलना सीखा भी … Continue reading ए नींद है कहा तू।