घर से आते वक्त।

मन भारी है। इसलिए नही की बारिश ने एक बार फिर मुझे रोकने की कोशिश की अपितु इसलिए क्योंकि एक बार फिर घर- परिवार को टाटा कहना है। एक मां है जिसे आज मैने सबसे ज्यादा क्रियाशील पाया क्योंकि वो मेरे जाने की त्यारियां में व्यस्त है। एक पिता है जो हमेशा की तरह आज भी मुझे स्टेशन पहुंचा गए और तब तक बैठे रहे जब तक ट्रेन प्लेटफार्म छोड़ नही दी। चाचा- चाची आशीर्वाद के साथ कुछ पैसे मिठाई खाने को कह के दे गए, जिसमे मिठाई के सिवाए और बहुत कुछ खरीदा जा सकता है। एक बूढ़े दादा जी हैं जिन्हे यकीन है की मैं आसपास कही गया हूं और हमेशा की तरह जल्दी ही वापिस आऊंगा। भाई- बहन जो अंदर से दुखी है फिर भी मुस्कुराते हुए चेहरे से अलविदा कह रहे है। कुछ दोस्त हैं जो हमेशा साथ खड़े हैं चाहे वो कहीं चलना हो या घूमना। एक लड़की है जिससे मुलाक़ात अधूरी रह गई। इन सब के लिए जल्द ही लौटने का मन करता है। पर अभी के लिए कुछ यादें दिल में तथा कुछ तस्वीरें कैमरे में संजोए चलना होगा। एक मंजिल की तलाश में। वापिस जल्द ही लौटेंगे। वो सब पूरा करेंगे जो इस बार अधूरे रह गए है।

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