कुछ लोग, कुछ घटनाएं, कुछ बातें!
कभी- कभार इस तरह आपको झकझोर देती है की आप अंदर से विचलित हो उठते है। आपका खुद और दुनिया, दोनो से विश्वास धीरे- धीरे कम होने लगता है। ये बात भी सच है की सभी लोग एक जैसे नही होते, फिर भी आप सबको एक ही नजरिए से देखने लगते है। आप भले ही उन्हें माफ कर दें पर घटनाएं तथा यादें जो आपको अनगिनत कष्ट दिए हो, आप नही भूल पाते। रिश्ते बने भी तो एक दरार हमेशा रह जाता है। अमूमन देखा जाता है की एक निश्चित समय बीत जाने के पश्चात, चाहे अवधि लंबी हो या छोटी, कुछ लोगों के लिए दूसरे लोगों की अहमियत खत्म हो जाती है।
यदि बस हम इतना ध्यान रखे की हमारे किए गए कार्य एवं बोले गए बात का दूसरे पर क्या प्रभाव होगा, हम कितने ही रिश्ते बचा सकते है। क्या ये इतना मुश्किल है? विचार कीजिए।
– Shashank